वर्षा ऋतु पर निबंध

वर्षा ऋतु पर निबंध | Hindi Essay On Varsha Ritu ( Rainy Season Essay )

Good morning  friends Get Hindi Essay On Varsha Ritu Rainy Season Essay In Hindi

Rainy season essay in hindi (Varsha Ritu Essay In Hindi )
Rainy season essay in hindi

मेरा प्रिय ऋतु :

हेमंत, शिशिर, वसंत, ग्रीष्म, वर्षा और शरद यह छह ऋतुओं के क्रम होते है, इन सुंदर ऋतुओं के क्रम सिर्फ हमारे देश में है | यह दूसरे देशों में नहीं पाया जाता | सब ऋतुओं की अपनी एक छटा होती है | इन सब ऋतुओं में मुझे वसंत ऋतु सबसे अधिक प्रिय है |  

वसंत ऋतु का हम सभी को आनंद देने वाला होता है | भारत में वसंत ऋतु मार्च, अप्रैल और मई के महीने मे आती है | वसंत ऋतु के आगमन पर सब लोग वसंत पंचमी का त्यौहार मना के खुशियाँ मनाते हैं |    वसंत ऋतु का आगमन शिशिर ऋतु के अंत होते ही सज – धज के साथ आ पहॅूंचती है | वसंत ऋतु के आगमन के लिये, बागों में, वाटिकाओं में, वनों में, सर्वत्र प्रकृती स्वागत की तैयारियाँ करने लगती है | कलियाँ अपने घॅूंघट खोल दती हैं | जूही, चंपा, चमेली, केतकी, गुलाब, आदि फूल अपनी सुगंध बिखेर देते हैं | भौंरे गॅूंज उठते हैं ओर तितलियाँ अपने चटकीले – चमकीले रंगों से ऋतुराज का स्वागत करने के लिए तैयार हो जाती हैं | सर्दियों की लंबी खामोशी के बाद, पक्षी हमारे चारों ओर घर के पास और आसमान में चहचहाना शुरू कर देते हैं | वसंत ऋतु के आगमन से धरती के कण-कण मे नया जीवन नजर आता है | 

सचमुच, वसंत की शोभा मेरे हृदय को उल्लास से भर देती है |  एक ओर शीतल, मंद, सुगंधित पवन के मधुर झोके मन की मतवाला कर देते हैं, तो दूसरी ओर फूलों की बहार बूढ़ों को भी जवान बना देती है | खिलती कलियाँ देखकर हमारे जी की कली भी खिल उठती है | अबीर-गुलाल के रूप में मानो हृदय का प्रेम उमड़ पड़ता है |

वसंत, सचमुच ऋतुराज है | लेकिन, कुछ लोगों को वसंत ऋतु से बेहतर वर्षा ऋतु को मानते है | पर कहाँ वर्षा का कीचड़ भरा मौसम और कहाँ वसंत की बहार | शरद की शोभा भी वसंत के सामने फीकी पड़ जाती है | 

वसंत का आगमन हाते ही मेरं मन में विविध रंगों की बहार छा जाती है |  मेरी कल्पना तरंगित हो उठती है | बागों में सैर करते मन नहीं भरता | मेरी आँखों पर प्रकृती के आकर्षण का चश्मा लग जाता है और मेरे दिल में उमंगों का सूर्योदय हो जाता है | कोयला के गीत मुझे कविता लिखने की प्रेरणा देते हैं| फूल मन को खिलना और ओठों को हँसना सिखाते हैं | तितली फूलों को प्यार करना और भोरे गुनगुनान सिखाते हैं | 

ऐसा मनभावन वसंत मुझे प्रिय क्यों न हो ? ऐसी अनोखी और मनभावन है मेरी प्रिय ऋतु वसंत |   

Hindi Essay On Varsha Ritu 2 :

वर्षाऋतु :

भारत में वसंत की ऋतुराज और वर्षा को ऋतुरानी कहा जाता है | वर्षा जलरूपी जीवन देने वाली ऋतु हे | भारत जैसे कृषिप्रधान देश के लिए तो वर्षात्रतु सुख-सौभाग्य का वरदान लेकर आती है | 

वर्षाऋतु से पहले बहुत गरमी पड़ती है | सूर्य की किरणें दिन में मानो अंगारे बरसाती हैं | पानी की कमी से लोगों में हाहाकार मच जाता है | लोग बड़ी आशा से आकाश की ओर देखते और वर्षा के लिए भगवान से प्रार्थना करते हैं | 

आषाढ़ का महीना लगते ही वर्षा के आगमन के संकेत मिलने लगते हैं | आकश में काले-काले बादल देखकर लोग खी से नाच उठते हैं | बादलों की गड़गड़ाहट और बिजली की कड़कड़ाहट लोगों में नवजीवन का संचार करती हैं | धीर-धीरे वर्षा का रिमझिम संगीत शुरू हो जाता है | गर्मी और आकुलता शांत हो जाती है | लोग हर्षविभोर होकर वर्षारानी का स्वागत करते हैं | 

वर्षा के आगमन से वातावरण शीतल और सुखद बन जाता है | वर्षा की बॅूंदों से धरती से सोंधी गंध उठती है | पेंड़-पौधे हरे-भरे हो जाते हैं | नदी-नाले, तालाब, पोखर पानी से छलक उठते हैं | पशु हरीदूब बड़े चाव से चरते हैं | आम की डाल पर बैठकर कोयल कूकने लगती है | वनों-बागों में मोर पंख फैलाकर मनोहर नृत्य करता है | पपीहे की ‘पिऊ-पिऊ’ से अमराई गॅूंज उठती है | आकाश में इंद्रधनुष की छटा देखते ही बनती है |

वर्षाऋतु आनंद एवं उल्लास की त्रतु है | गाँवों की चौपालों में कजरी और मल्हार के रूप में आनंद का वातावरण छा जाता है | लड़कियाँ झूले झूलने लगती हैं | किसान खरीफ कीफसल के लिए जाताई-बोवाई के काम में लग जाते हैं | १५ अगस्त, रक्षाबंधन, जन्माष्टमी तथा गणेशोत्सव जैसे पर्व वर्षाऋतु के आनंद में चार चाँद लगा देते हैं |

वर्षा कवियौं तथा कलाकारों की प्रिय त्रतु है ! चित्रकार वर्षात्रतु के मनोहर दृश्यों का चित्रांकन करते हैं | 

इस ऋतु में कभी-कभी अतिवृष्टि के कारण नदियों में बाढ़ से फसलें नष्ट हो जाती हैं, झोंपड़े और कच्चे मकान धराशायी हो जाते हैं और बहुत-से लोग बेधर हो जाते है | जानमाल का बहुत नुकसान होता है | इस तु में मलेरिया जैसी बीमारियाँ भी फैल जाती हैं | 

फिर भी, वर्षाऋतु का महत्त्व कम नहीं | जीवनरूपी जल देने वाली वर्षाऋतु के उपकारों को हम कैसे भूल सकते है |

 

 

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