माँ पर निबंध

माँ पर निबंध | Essay On Mother In Hindi

Essay On Mother In Hindi :

Essay On Mother In Hindi माँ पर निबंध
Essay On Mother In Hindi

माँ एक ऐसा अनमोल रत्न है जिसके बारे में शब्दों में बयाँ करता बहुत कठिन है | कहते है की भगवान हर किसी के साथ नही रह सकता इसलिए उन्होंने माँ जेसे अनमोल रत्न को बनाया | माता की गोद में बैठने का सुख त्रैलोक्य के राज्य-सिंहासन पर बैठने के सुख से भी पढ़कर है !

मातृप्रेम की तुलना में संसार के सारे प्रेम फीके पड़ जाते हैं | माँ बच्चे की मुसकराहट देखकर स्वर्गीय सुख का अनुभव करती है | जब बच्चा रोता-बिखता है या कभी गिर पड़ता है, तब माँ उसे कितने दुलार से उठाती है ओर चूम-चाटकर उसका मन बहलाती है | बच्चा निकम्म, कूरूप, मंदबुध्दि, अंधा या गॅूंगा हो, फिर भी उसके प्रति माता के प्रेम में कभी कमी नहीं आती ! माता जिस प्रकार सुंदर, होनहार बच्चे का पालनपोषण करती है, उसी प्रकार साधारण बच्चे का भी पालन-पोशण करती है | बालक के रोगप्रस्त होने पर माता उसकी देखभाल में दिन-रात एक कर देती है | 

पिता पुत्र को इसलिए पालता-पोसत और पढ़ात-लिखाता है कि बुढ़ापे में वह घर का उत्तरदायित्व सँभाले और उसकी सेवा करे | पुत्र निकम्मा या कपूत निकल जाए तो हो सकता है पिता उसे घर से निकाल दे या उसकी शिक्षा-दीक्षा में पैसा खर्च करने से इनकार कर दे, लेकिन माता कभी ऐसा सोच भी नहीं सकती | 

माता के नि:स्वार्थ प्रेम से बच्चे मे अनेक सद्गुणों का विकास होता है | माता के सदाचरण, सद्भाव और सतप्रवृत्ति की अमिट छाप बालक के मन पर पड़ती है | माता का स्नेह ही बालक को आदर्श मनुष्य बनाता है | माता के प्रोत्साहन से ही ध्रुव को ध्रुव-पद की प्राप्ति हुई थी | यदि माता जीजाबाई शिवाजी को अच्छी शिक्षा न देतीं तो शिवाजी छत्रपति न बन पाते | मोहनदास को महात्मा गांधी बनाने वाली उनकी माता पुतलीबाई ही थी | सचमुच, वात्सल्य मूर्ति माताओं ने नररत्नों का निर्माण किया है | 

पुत्र कुपुत्र हो सकता है, लेकिन माता कभी कुमाता नहीं होती | वात्सल्यमयी माता का स्नेह अपार एवं अनुपम होता है | 

 

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