बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर निबंध

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर निबंध | Hindi Essay On Beti Bachao Beti Padhao

बेटी बचाओ, बेटी पढाओ :
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर निबंध | Hindi Essay On Beti Bachao Beti Padhao
Hindi Essay On Beti Bachao Beti Padhao

आज -कल बेटीया याने महिलाएँ बहुत ओगे पहॅूंच गई है | आज के महिलाएँ पढ़ी – लिखी है | पर इससे पहिले जमाने में महिलाओं को पढ़ाई – लिखाई की अनुमति सख्त मनाई थी | वे सिर्फ घर के लिए कामों के लिए इस्तेमाल किए जाती थी | उनपर बहुत अत्याचार और झुल्म हुए थे | चाहे, महिलाएँ शारिरीक बल से कमजोर हो, लेकिन वे मानसिक बल से बहुत ताकदवर होती हैं | महिलाए हर एक क्षेत्र में अच्छी और महनती होती है | 

महान महिलाएँ जैसे – कल्पना चावला, पंडित – रमाबाई, सावित्रीबाई फुले और आदि महिलाएँ जिनके बुलंद होसलों की वजह से महिलाएँ आगे बढ़ी है | हमारे बचपन से लेकर बुढ़ापे तक हमे एक ही कारण से आगे बढ़ते है, महिला के कारण | बचपन में जान से भी प्यारी मोँ, जवानी में पत्नि, और बुढ़पे में बेटी | इससे पहले महिलाओं को कुछ भी आज़ादी नहीं थी | मैं एक पंक्ति प्रस्तुत करना चाहॅुंगी – सुनो – 

सुनो, सुनो – सुनो, सुनो – सुनो, 

मेरी आवाज, मुझे पंख मिले है आज, 

मुझे लेने दो एक उड़न | 

 

2 : “बेटी बचाओ, बेटी बढ़ाओ”

” बेटी हे जन्नत की शान बेटी के बिना ना है इस दूनिया की कोई पेहचान | बेटी है खूशियाँ का सागर, बेटी है खुबसुरती की सरिता | इसके बिना ना हो पाएगा इस देश का विकास, इसलिए ही कहते है, अगर बेटी पढ़ी तो देश के विकास की गति बढ़ी|” आज न जाने कहाँ-कहाँ तक पहॅूंच गई है यह बेटियाँ| पहले जो बेटियों के लिए घर के चूले से लेकर घर के आँगन में खडी तुलसी पेड तक का ही जीवन था, वह आज पूरे संसार का आँगन और स्वतंत्रता का क्षितीज बन चुका है | पर अब भी कई इलाकों में बेटियों को इतनी भी स्वतंत्रता नहीं मिलती है | अब भी वह इन समाज की बेटियों में बंधी हुई है | 

क्या उन्हें नही लगता कि उन्हें भी स्वतंत्रता मिले ? क्या उन्हें नहीं लगता कि वह भी आसमान में आजाद पंछी की तरी ? क्या उन्हें नही लगता की वह भी अपने मन के छंद छुए ? अगर उन्हें हम एक मौका दे , तेा जरूर करने कि इच्छा रखनेवाले कुछ कर दिखाते ही है | और उनमें से एक है बेटियाँ | आज कल की दूनिया में भी हमें बहोत से उदाहरण मिलेंगे, जैसे किरण बेदी, कल्पना चावला, सुनिता विलयम्स, हिमा दास, पि. व्ही, सिन्धु, सानिया मिरझा आदि | पर अब भी वही बोझ हमारा समाझ उनपर दोहारता है | वही सब – स्त्री भृनहत्या स्त्रीयों को उनके अधिकर न देना, उनको निचा दिखना आदि बहोत ऐसी चिजे है जो स्त्रियों को अपनी मंझील तक पहफंचने ही नही देते | और आखरी बात ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ओं’ के नारे लगाने से कुछ होगा, जब तक यह बात सभी भारत वासियों के मन में बैठ जानी चाहिए | तब जाकर हमारा देश ‘इस नाम से पूर विश्व में ज्ञात होगा |

“भारत माता की जय !!” 

 

3 : “बेटी बचाओ, बेटी बढ़ाओ”

आज कल के जमाने में लड़कीयाँ पढ़ी लिखी होती है | पर कुछ लोग जगह में लडकीओं पढ़ाने के लिए अनूमी नहीं देते | पर कुछ लोग यह नीयम तोडकर बेटीयों को पढ़ते है | हमारे देश में यही समस्या हर जगह में है | 

पर कुछ इलाको में लोग यह समझते है कि लडकीयों को पढ़ाने से बूरा होता है | कुछ लोग बेटी पैदा हुई तो उन्हें मार डालते है | पर कुछ लोग है कि उन्हें बेटी हो | इसलिए वह आलदोलन करते है | पर अनदोलन से कुछ लोग इसे नजर अंदाज करने है | कुछ लोगो ने आनदोलन का नाम निकाला हे “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ | ” पर हमारे देश के प्रधानमंत्री श्री. नरेंद्र मोदी जी ने यह फेसला लया है की बेटयों को कोई कुछ नही करेगा और बेटीयों पढाया जाएगा | पर अभी यह  कुछ गाँव में चालू है | अगर में मंत्री होना में हर हार में जाकर केहना ” बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओं | ”

 

 

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